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विशेष तरलता योजना के तहत एनबीएफसी, आवास वित्त कंपनियों से करीब 10 हजार करोड़ रुपये के अनुरोध मिले

नई दिल्ली: वित्त मंत्रालय ने रविवार को कहा कि कोरोनावायरस महामारी के कारण दिक्कतों का सामना कर रही गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और आवास वित्त कंपनियों (एचएफसी) से 10 हजार करोड़ रुपये के वित्त पोषण के अनुरोध प्राप्त हुए हैं.

सरकार ने आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे एनबीएफसी और एचएफसी के लिये एक जुलाई से 30,000 करोड़ रुपये की विशेष तरलता योजना की शुरुआत की है.

इसके तहत भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड द्वारा गठित एक न्यास की प्रतिभूतियों को खरीदकर वित्त उपलब्ध कराया है. ये प्रतिभूतियां सरकार से शत-प्रतिशत गारंटी प्राप्त हैं.
वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा, ‘आरबीआई ने भी एक जुलाई 2020 को एनबीएफसी और एचएफसी को एक परिपत्र जारी किया है. एसबीआई कैपिटल मार्केट्स लिमिटेड को सात जुलाई 2020 को 9,875 करोड़ रुपये के वित्तपोषण के लिये 24 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिन पर कार्रवाई की जा रही है.

बयान में कहा गया कि पहले आवेदन को मंजूरी दे दी गयी है और शेष भी विचाराधीन हैं.

विशेष तरलता योजना (एसएलएस) ट्रस्ट की निवेश समिति ने आवेदक द्वारा जारी वाणिज्यिक पत्र में 200 करोड़ रुपये तक के निवेश को मंजूरी दी है.

सितंबर 2018 में आईएलएंडएफएस समूह की कंपनियों द्वारा भुगतान में एक के बाद एक चूक करने के बाद एनबीएफसी और एचएफसी आर्थिक दिक्कतों में आ गये. कोरोना वायरस महामारी ने इनके संकट को और बढ़ा दिया.

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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा घोषित आत्मनिर्भर भारत पैकेज की हालिया समीक्षा के दौरान सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिये तीन लाख करोड़ रुपये की आपात ऋण गारंटी योजना समेत विभिन्न योजनाओं की प्रगति पर चर्चा की गयी.

बयान में कहा गया कि बैंकों ने आपातकालीन ऋण सुविधा गारंटी योजना के तहत लगभग 1,20,099 करोड़ रुपये के ऋण को मंजूरी दे दी है. हालांकि, नौ जुलाई तक 61,987.90 करोड़ रुपये का ही वितरण हुआ.

इसके अलावा, नाबार्ड द्वारा क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) और सहकारी बैंकों के लिये 30 हजार करोड़ रुपये की फ्रंट-लोड विशेष पुनर्वित्त सुविधा का आवंटन कर दिया गया है. इस विशेष सुविधा से तीन करोड़ छोटे किसानों को लाभ मिलेगा.

बयान में कहा गया कि खरीफ फसलों की बुआई पहले ही तेज गति से चल रही है. योजना के तहत छह जुलाई तक कुल 30 हजार करोड़ रुपये में से 24,876.87 करोड़ रुपये का वितरण हो चुका है.

बयान में एनबीएफसी के लिये 45 हजार करोड़ रुपये की आंशिक ऋण सुविधा गारंटी योजना 2.0 के संबंध में कहा गया कि बैंकों ने तीन जुलाई 2020 तक 14 हजार करोड़ रुपये के पोर्टफोलियो की खरीद को मंजूरी दे दी है और छह हजार करोड़ रुपये के सौदे अनुमोदन की प्रक्रिया में हैं.

बयान के अनुसार, 14 मई से 31 मार्च 2021 तक किये गये लेनदेन के लिये टीडीएस / टीसीएस दर में 25 प्रतिशत की कटौती के माध्यम से 50 हजार करोड़ रुपये की तरलता प्रणाली में डाली गयी है.

इसके अलावा केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आठ अप्रैल से 30 जून के बीच, 20.44 लाख से अधिक मामलों में 62,361 करोड़ रुपये से अधिक के रिफंड जारी किये हैं. शेष रिफंड प्रक्रिया में हैं.

Source News : The Print Hindi

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