नारी का सम्मान ही, पौरूषता की आन

नारी का सम्मान ही, पौरूषता की आन, नारी की अवहेलना, नारी का अपमान। मां-बेटी-पत्नी-बहन, नारी रूप हजार, नारी से रिश्ते सजे, नारी से परिवार। नारी बीज उगात है, नारी धरती रूप, नारी जग सृजित करे, धgर-धर रूप अनूप। नारी जीवन से भरी, नारी वृक्ष समान, जीवन का पालन करे, नारी है भगवान। नारी में जो […]

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